Friday, 12 April 2013

नवरात्रि में देवी भक्ति के क्यों और कैसे होते हैं शुभ प्रभाव? जानिए कुछ अनजाने पहलू

हर काम में शक्ति की जरूरत होती है। इससे साफ है कि संसार में रचना, पालन और विनाश जैसा अद्भुत काम किसी महाशक्ति द्वारा ही संभव है। हिन्दू धर्म में महाशक्ति का यही स्वरूप आद्यशक्ति के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक आदि शक्ति परब्रह्म का ही रूप है, जो साकार न होकर भी चर-अचर जगत में फैली कई रूपों व शक्तियों में नजर आती है। 
वेदों में भी देवी ने खुद को हर काम का फल और वैभव देने वाली बताया है। वहीं दुर्गासप्तशती में भी देवी की महिमा का एक मंत्र उजागर करता है कि पूरे ब्रह्माण्ड को शक्ति और ऊर्जा निराकार रूप में आदिशक्ति द्वारा ही मिलती है। लिखा है कि - 

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।। 

जिसका मतबल यही है कि पंचतत्वों यानी आकाश, जल, वायु, अग्रि और पृथ्वी सहित सभी प्राणियों में बसी शक्तिरूपा व प्राणदायी देवी को बार-बार मेरा नमस्कार है। साफ है कि देवी ही ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री है।

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