Friday, 12 April 2013

हर मुश्किल को पटखनी दे दुर्गासप्तशती का यह चमत्कारी मंत्र


इच्छाएं केवल सोचने से पूरी नहीं होती, बल्कि सोच को व्यवहार में उतार कोशिशों से ही मुमकिन है। धार्मिक उपायों द्वारा शक्ति साधना की कोशिशों को सफल बनाने के लिए देवी उपासना की बड़ी अहमियत है। देवी भक्ति न केवल मनोवांछित बल्कि शीघ्र ही शुभ फल देने वाली मानी गई है। देवी साधना के लिए दुर्गासप्तशती या उसके अचूक मंत्रों का स्मरण श्रेष्ठ  उपाय है।
नवरात्रि शक्ति उपासना की विशेष घड़ी होती है। खासतौर पर दुर्गासप्तशती के अद्भुत मंत्रों में ही एक मंत्र जीवन से जुड़ी हर कामनापूर्ति जैसे धन, धान्य या संतान आदि के साथ उनमें आने वाली बाधाओं का भी अंत करने वाला माना गया है यानी यहां बताया जा रहा मंत्र विशेष माथे से चिंता की सारी लकीरें मिटाने वाला साबित हो सकता है। अगली तस्वीर को क्लिक कर जानिए, यह मंत्र और उसके स्मरण की आसान विधि - 
- नवरात्रि में सुबह और शाम दोनों वक्त इस मंत्र का पाठ किया जा सकता है। स्नान के बाद देवी के किसी भी रूप की लाल वस्त्र पर विराजित मूर्ति या तस्वीर के सामने सुगंधित धूप व घी का दीप जलाकर माता को लाल चंदन लगाकर लाल फूल यथासंभव लाल गुड़हल या गुलाब के फूल अर्पित करें।
- मौसमी फल का भोग लगाएं और कामनापूर्ति की प्रार्थना के साथ नीचे लिखा दुर्गासप्तशती का मंत्र पूर्व या उत्तर दिशा में मुख कर लाल आसन पर बैठ बोलें या स्फटिक की माला से यथाशक्ति जप करें -
सर्वबाधा विर्निमुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।
-  मंत्र स्मरण या जप के बाद देवी की दीप व कर्पूर आरती कर क्षमाप्रार्थना करें। 

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